भारत की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड (Maruti Suzuki India Ltd) ने सितंबर 2025 की तिमाही (Q2) के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी ने मजबूती दिखाई है। जहां एक तरफ घरेलू बिक्री में गिरावट दर्ज की गई, वहीं रिकॉर्ड एक्सपोर्ट ग्रोथ ने कंपनी के मुनाफे को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
मुनाफे में 8% की बढ़ोतरी
मारुति सुज़ुकी ने सितंबर 2025 तिमाही में कुल ₹3,349 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹3,102.5 करोड़ की तुलना में 8% की वृद्धि को दर्शाता है।
कंपनी ने बताया कि यह उछाल मुख्य रूप से एक्सपोर्ट ग्रोथ और बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी के कारण आया है।
राजस्व (Revenue) में 13% की बढ़त
मारुति सुज़ुकी का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस यानी परिचालन से होने वाली आय इस तिमाही में ₹42,344.2 करोड़ रही, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹37,449.2 करोड़ थी।
यह लगभग 13% की वार्षिक वृद्धि (YoY Growth) है, जो दिखाता है कि कंपनी ने घरेलू चुनौतियों के बावजूद मार्केट में मजबूत पकड़ बनाए रखी है।
खर्चों में भी बढ़ोतरी
हालांकि, कंपनी के कुल खर्च (Total Expenses) भी बढ़कर ₹39,018.4 करोड़ हो गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में (₹33,879.1 करोड़) काफी अधिक हैं।
यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, लॉजिस्टिक कॉस्ट, और मार्केटिंग खर्चों के कारण हुई है।
घरेलू बिक्री में गिरावट
कंपनी के मुताबिक, डोमेस्टिक व्होलसेल्स (Domestic Wholesales) यानी घरेलू बाजार में थोक बिक्री में 5.1% की गिरावट आई है।
इस तिमाही में कंपनी ने 4,40,387 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा ज्यादा था।
मारुति सुज़ुकी ने बताया कि ग्राहकों ने जीएसटी (GST) से जुड़ी संभावित कीमत कटौती की उम्मीद में खरीदारी को टाल दिया, जिससे बिक्री पर असर पड़ा।
एक्सपोर्ट्स ने संभाला मोर्चा
जहां घरेलू बिक्री कमजोर रही, वहीं एक्सपोर्ट्स ने कंपनी को नई उड़ान दी।
मारुति सुज़ुकी ने इस तिमाही में 1,10,487 यूनिट्स का निर्यात (Exports) किया, जो पिछले साल की तुलना में 42.2% अधिक है।
यह कंपनी के इतिहास में सबसे अधिक तिमाही निर्यात (Highest-Ever Quarterly Export) का रिकॉर्ड है।
इस शानदार प्रदर्शन के चलते कुल बिक्री मात्रा (Overall Sales Volume) 1.7% बढ़कर 5,50,874 यूनिट्स तक पहुंच गई।
कंपनी के प्रदर्शन का विश्लेषण
मारुति सुज़ुकी का यह प्रदर्शन यह दिखाता है कि कंपनी ने घरेलू चुनौतियों के बावजूद ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत की है।
भारत में भले ही ग्राहक खरीदारी टाल रहे हों, लेकिन अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में मारुति की कॉम्पैक्ट कारों और एसयूवी मॉडलों की मांग बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मारुति का “Make in India for the World” मॉडल उसकी सफलता की कुंजी बनता जा रहा है।
किन कारकों ने मुनाफे को बढ़ाया
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एक्सपोर्ट ग्रोथ: 42% की वृद्धि ने कंपनी की इनकम को संतुलित रखा।
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बेहतर प्रोडक्शन एफिशिएंसी: लागत घटाने और ऑपरेशनल परफॉर्मेंस सुधारने पर जोर।
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नए मॉडल लॉन्च: हाल ही में लॉन्च किए गए हाइब्रिड और एसयूवी मॉडल्स ने विदेशी बाजारों में लोकप्रियता पाई।
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रुपये में गिरावट: विदेशी मुद्रा दरों में बदलाव ने एक्सपोर्ट रेवेन्यू को फायदा पहुंचाया।
चुनौतियाँ अभी बाकी हैं
हालांकि कंपनी के तिमाही नतीजे मजबूत हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं—
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घरेलू बाजार में उपभोक्ता मांग की धीमी रफ्तार।
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ईंधन की बढ़ती कीमतें जो उपभोक्ताओं के निर्णयों को प्रभावित कर रही हैं।
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इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा – टाटा, महिंद्रा और अन्य नए खिलाड़ियों से मुकाबला।
आगे की रणनीति
मारुति सुज़ुकी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में कंपनी नई एसयूवी और हाइब्रिड गाड़ियाँ लॉन्च करने की योजना बना रही है।
कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले वित्त वर्ष में एक्सपोर्ट्स को और 10–15% तक बढ़ाया जाए और घरेलू बाजार में फिर से गति लाई जाए।
कंपनी EV सेगमेंट में भी कदम बढ़ा रही है, और उम्मीद है कि 2026 तक अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार भारतीय बाजार में पेश करेगी।
निष्कर्ष
मारुति सुज़ुकी के सितंबर 2025 तिमाही नतीजे यह साबित करते हैं कि कंपनी केवल घरेलू बाजार पर निर्भर नहीं है, बल्कि उसने वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान मजबूत की है।
भले ही घरेलू बिक्री में थोड़ी गिरावट आई हो, लेकिन एक्सपोर्ट्स की रिकॉर्ड ग्रोथ और बढ़ता राजस्व यह दर्शाते हैं कि कंपनी की रणनीति सही दिशा में जा रही है।
अगर आने वाले महीनों में GST अनिश्चितता खत्म होती है और त्योहारी सीजन में बिक्री बढ़ती है, तो मारुति सुज़ुकी फिर से भारतीय ऑटो बाजार में अपनी रफ्तार तेज कर सकती है।
संक्षेप में:
मारुति सुज़ुकी का सितंबर 2025 का प्रदर्शन यह दिखाता है कि सही रणनीति, वैश्विक दृष्टिकोण और उत्पादन क्षमता के दम पर कंपनी हर चुनौती को अवसर में बदल सकती है।
जहां घरेलू मांग थोड़ी सुस्त है, वहीं विदेशी बाजारों से मिल रही मजबूती कंपनी के लिए भविष्य की स्थिरता का संकेत है।